अंतिम समय की महत्वता: श्री बिहारी वल्लभ शरण जी महाराज के उपदेश से जीवन का सार

अपने जीवन के अंतिम पलों में हरि नाम का महत्व

गुरुजी के उपदेश ने हमें बताया कि मनुष्य जीवन के अंतिम पलों में श्री हरि नाम और भगवत कथा सुनना कितना महत्वपूर्ण है। जीवन की अंतिम घड़ियों में भगवान का नाम सुनना आत्मा की मुक्ति की दिशा में एक प्रभावी कदम होता है। उनके लिए जो अंतिम समय में ठीक बोल नहीं पाते, उनके कानों में राधा नाम उच्चारण कराना भी महत्वपूर्ण है।

सेवा की महानता

श्री महाराज जी ने बताया कि जिनके पास ज़्यादा साधन नहीं होते और जो अपने जीवन के अंतिम क्षणों में होते हैं, उनके लिए सेवा का अवसर प्राप्त करना वास्तव में एक भाग्यशाली कार्य है। इसमें अन्य हॉस्पिटल वाले जो मरीजों को लाइलाज घोषित कर देते हैं, उन्हें घर भेज देने के बजाय भगवद नाम और हरि कीर्तन सुनवाना ज्यादा फलदायी हो सकता है।

वृंदावन में सेवा का केंद्र

गुरुजी के अनुसार, वृंदावन में एक ऐसा स्थान होना चाहिए जहाँ इन मरीज़ों की सेवा की जा सके। यह स्थान उनके लिए होगा जो अंतिम समय में सेवा की आवश्यकता रखते हैं और जिन्हें भगवत प्राप्ति की संभावना हो। ऐसा सेवा केंद्र बनाना एक महान सेवा होगी।

भगवत प्राप्ति की गारंटी

महाराज जी ने समझाया कि अगर अंतिम समय में भगवद नाम कीर्तन किया जा रहा है, चरणामृत मुख में है, और ब्रज रज का संपर्क है, तो भगवत प्राप्ति निश्चित है। इस पर हमें कोई संदेह नहीं करना चाहिए। भले ही जीवन में कोई गलतियाँ की हो, अंतिम चरण में यह सेवा मिल जाती है तो मुक्ति संभव है।

अंत की तैयारी कैसे करें

  1. भगवत नाम की निरंतरता – जीवन में संभव हो तो भगवत नाम की तन्मयता बनाए रखें।
  2. ईमानदारी और सच्चाई – भक्ति का वास्तविक रूप में अभ्यास करें, बिना किसी दिखावे के।
  3. समाज सेवा में भागीदारी – सेवा कार्यों में सहभागी बनें जैसे कि जीवन की अंतिम यात्रा को संभालना।
  4. भावना का महत्व – गुरुजी ने बताया कि भावना में बड़ी दम होती है, भाव से किया गया कार्य जरूर सिद्ध होता है।

FAQs

प्रश्न 1: अंतिम समय में हरि नाम का महत्व क्यों है?
उत्तर: अंतिम समय में हरि नाम सुनना आत्मा के मोक्ष की दिशा में ले जाता है और जीवन के बुरे कर्मों का नाश करता है।

प्रश्न 2: क्या अंतिम सेवा में भाग लेने से भगवत प्राप्ति होती है?
उत्तर: हां, दूसरों की अंतिम यात्रा को संभालने से खुद की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

प्रश्न 3: सेवा केंद्र कैसे स्थापित करें?
उत्तर: कुछ समर्पित लोग मिलकर इस कार्य को अर्थव्यवस्था के माध्यम से शुरू कर सकते हैं। भूमि और संसाधनों को मिलकर प्रबंधित कर सकते हैं।

प्रश्न 4: यदि व्यक्ति अंतिम समय में विक्षिप्त अवस्था में हो तो क्या करें?
उत्तर: इस स्थिति में भी नाम कीर्तन और चरणामृत को जबरदस्ती भी ग्रहण कराया जा सकता है।

प्रश्न 5: सेवा का भाव कैसे विकसित करें?
उत्तर: भगवान और गुरु की कृपा से, ईमानदारी और सच्चाई से सेवा का भाव विकसित किया जा सकता है।

अंत में, गुरुजी के उपदेश के अनुसार, इस धरती पर दूसरों की अंतिम यात्रा को संभालने से बड़ा कोई सत्कर्म नहीं है। यह कार्य न सिर्फ दूसरों का हित साधता है बल्कि हमारा खुद का मंगल भी सुनिश्चित करता है। ऐसी सेवा और भक्ति का कार्य करने से परम लाभ और मोक्ष प्राप्ति संभव है।

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Originally published on: 2024-06-27T05:54:10Z

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