आखिरी यात्रा का महत्व: गुरुजी के प्रवचन से प्रेरित एक कथा
गुरुजी बिहारी वल्लभ शरण जी महाराज के एक प्रवचन की कथा हमें इस बात का अहसास दिलाती है कि जो अंतिम समय में हरि नाम और भगवद् कथा का श्रवण करता है, वह निश्चित रूप से भगवत प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है। गुरुजी ने बताया कि जिन्होंने 200 से 250 भक्तों की सेवा की थी, उन्हें अंतिम सांसों में हरि नाम और राधा नाम सुनने को मिला। यह न केवल उनके लिए पूरा जीवन बदलने वाला अनुभव था, बल्कि इन भक्तों ने अंत में परम शांति प्राप्त की।
सेवा का महत्व
गुरुजी ने यह अत्यंत महत्वपूर्ण बताया कि सेवा के माध्यम से दूसरों का जीवन बदलने में विश्वास करना चाहिए। जब कोई व्यक्ति अंतिम समय में हरि नाम और भागवत कथा सुनता है, तो उसे महत उपकार मिलता है। गुरुजी इस सत्यता को प्रमाणित करते हैं कि अंतिम सांसों में हरि नाम या राधा नाम सुनने से भगवत प्राप्ति निश्चित होती है।
ईमानदारी और भावना
प्रवचन के दौरान, गुरुजी ने इस बात पर जोर दिया कि सेवा और भक्ति सच्ची भावना और ईमानदारी के साथ करनी चाहिए। दिखावटी प्रयास या धन संचय से यह पवित्र कार्य प्रभावित होता है। गुरुजी के अनुसार, भगवत प्राप्ति की इच्छा रखने वाले को इसे सच्चे और सरल हृदय से करना चाहिए।
वृंदावन में सेवा का स्थान
गुरुजी ने यह भी बताया कि वृंदावन जैसे पवित्र स्थान में एक ऐसा केंद्र खोलने की उनकी इच्छा है जहां लाइलाज मरीजों की सेवा की जा सके। यह सेवा न केवल उनके शारीरिक पीड़ा को कम करेगी, बल्कि उनके आध्यात्मिक उद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी होगी।
अनुचर की भूमिका
गुरुजी ने अपने अनुयायियों को प्रेरित किया कि वे दूसरों के मंगल के लिए समर्पित रहें। एक व्यक्ति अकेले यह कार्य नहीं कर सकता, परंतु समर्पण और एकजुटता से यह संभव है।
भगवत प्राप्ति का आश्वासन
गुरुजी ने यह तय किया कि यदि अंतिम समय में कोई व्यक्ति हरि नाम, राधा नाम या भगवद् कथा सुनने का प्रयास करता है, तो उसे भगवत प्राप्ति होती है। यह प्रक्रिया सरल है, परंतु हृदय से विश्वास करने पर ही प्रभावी होती है।
FAQs
प्रश्न 1: क्या भगवत प्राप्ति अंतिम समय में भी संभव है?
उत्तर: हाँ, गुरुजी के अनुसार, जो व्यक्ति अंतिम समय में हरि नाम, राधा नाम या भागवत कथा सुनता है, वह भगवत प्राप्ति की ओर अग्रसर होता है।
प्रश्न 2: क्या सेवा का भाव वास्तव में भगवत प्राप्ति में सहायक होता है?
उत्तर: निःसंदेह, ईमानदारी और सच्चे हृदय से सेवा करने से व्यक्ति की अपनी आत्मा का भी उद्धार होता है।
प्रश्न 3: गुरुजी के लक्ष्य और उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर: गुरुजी का मुख्य उद्देश्य यह है कि अंतिम समय में व्यक्ति भगवद् नामों के संपर्क में आ सके और उसे मोक्ष प्राप्त हो।
प्रश्न 4: वृंदावन में सेवा केंद्र की स्थापना के लिए क्या प्रेरणा है?
उत्तर: लाइलाज मरीजों की सेवा और उनके अंतिम समय में हरि नाम का पुण्य उनको मोक्ष की दिशा में ले जाता है, यही प्रेरणा है।
प्रश्न 5: कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है कि व्यक्ति भगवत प्राप्ति करेगा?
उत्तर: व्यक्ति को अंतिम समय में हरि नाम, राधा नाम या भागवत कथा का श्रवणे करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
समापन में, गुरुजी के प्रवचन से यह सिखने को मिलता है कि भक्ति और श्रद्धा के बल पर ही किसी व्यक्ति की आत्मा का मैत्रीपूर्ण और आनंददायक उद्धार संभव है। चाहे कोई कितना भी पापी क्यों न हो, अंतिम समय में की गई सच्ची भक्ति उसे भगवत प्राप्ति की ओर ले जा सकती है।
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Originally published on: 2024-06-27T05:54:10Z
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