उठो, गरजो और मुस्कुराते हुए जियो: गुरुजी का दिव्य संदेश
हमें जीवन में हर दिन एक नए उत्साह, नए जोश और नई ऊर्जा के साथ जीना चाहिए। गुरुजी ने अपने दिव्य प्रवचन में जो संदेश दिया—“अरे जितने दिन जियो ताल ठोक के जियो, मस्त जियो, अविनाशी के बच्चा हो”—उसमें एक अद्भुत प्रेरणा छिपी हुई है। यह संदेश न सिर्फ हमें प्रतिदिन सकारात्मक रहने का मार्ग दिखाता है, बल्कि हमारी आत्मा को जागृत करके विषम परिस्थितियों में भी खुश रहना सिखाता है। आइए इस संदेश को और गहराई से समझें और अपने जीवन में आत्मसात करें।
हमें सदैव याद रखना होगा कि हम सब परमात्मा के अंश हैं। गुरुजी बताते हैं, “तुम सच्चिदानंद भगवान के अंत हो, गरजो, नाम जप करो, सिंहवत रहो।” यह वाक्य हमें अभय बनाकर अपने भीतर छिपी हुई दिव्य शक्ति का बोध कराता है। जीवन का उद्देश्य केवल संसारिक सुख और शरीर-केन्द्रित इच्छाओं को पूरा करना नहीं है, बल्कि आत्मिक उत्थान तथा ईश्वर-स्मरण के सहारे आनंद के उच्च शिखर पर पहुँचना है। जब हम इस राह पर चलेंगे तो हमारा मन सदा प्रसन्न और शांत रहेगा।
हमें क्यों उठना चाहिए, क्यों गरजना चाहिए?
गुरुजी का मुख्य संदेश है कि हम आलस, निष्क्रियता या हताशा में समय न गँवाएँ। “उठो, तुम सच्चिदानंद भगवान के अंत हो, गरजो”—इसके पीछे यह भाव निहित है कि दिव्यता हमारे भीतर ही विद्यमान है। यह दिव्यता हमें आगे बढ़ने, दूसरों की सहायता करने और भक्ति करने का अनंत सामर्थ्य देती है। किंतु अगर हम इस वास्तविकता को भुला देंगे, तो जीवन बोझिल तथा लक्ष्यहीन होकर रह जाएगा।
हँसते-हँसते हरि के पास जाने का अर्थ
जब गुरुजी कहते हैं, “और जब जाओ तो मुस्कुराते हुए हरि के पास जा,” तब वे इस तथ्य पर जोर देते हैं कि अंत समय तक प्रसन्नता, समर्पण और भक्ति का भाव न छूटे। हम तन और मन से जो भी करते हैं, अंततः उसी ऊर्जा को आगे भी साथ लेकर जाते हैं। यदि हम मन में सौहार्द, प्रेम और भक्ति रखेंगे तो हमारी यात्रा भी निर्दोष और मंगलमय होगी।
जीवन में ताल ठोककर जीना: आत्मविश्वास और समर्पण
- आत्मविश्वास और प्रेरणा:
- समर्पण और भक्ति:
H2: सत्संग और नाम स्मरण का महत्त्व
गुरुजी के प्रवचनों में बार-बार यह बात सामने आती है कि सत्संग सुनना और नाम स्मरण करना बहुत आवश्यक है। जब हम सत्संग में बैठते हैं, तो हृदय और मस्तिष्क दोनों का शोधन होता है। नकारात्मक विचारों का परिमार्जन होकर सकारात्मक विचारों का उदय होता है। सत्संग एक ऐसा दर्पण है, जिसमें हम अपनी कमियों और अच्छाइयों को स्पष्ट रूप से देख पाते हैं। इससे हमारे व्यक्तित्व का परिष्कार होता है और हम अपनी आत्मिक यात्रा में एक कदम आगे बढ़ते हैं।
H3: नाम जप और भजन के लाभ
• मानसिक शांति: जब भी हमारा मन अशांत होने लगे, तो नाम जप या भजन करने से चित्त तुरंत शांत हो जाता है।
• नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: भजन और कीर्तन के माध्यम से हमारी चेतना दिव्यता से जुड़ जाती है। नकारात्मकता और कलुषित विचार दूर होने लगते हैं।
• ईश्वर के समीप अनुभव: नाम जप और भजन की आदत हमारे मन को निरंतर ईश्वर का स्मरण कराती है, जिससे जीवन में समरसता और संतुष्टि की अनुभूति बनी रहती है।
H2: अपने भीतर के खेल को समझें
गुरुजी कहते हैं, “तुम्हारे रचे हुए खेल में तुम न चाहो तो कौन पार हो सकता है…अगर हमसे त्रुटि हुई तो तुम्हारे ही खेल में तो हुई।” इस वाक्य में दर्शाया गया है कि हमारी सारी उलझनों का स्रोत अक्सर हमारे ही भीतर होता है। हम जिस संसार को दोष देते हैं, जिस हालात को लेकर शिकायत करते हैं, वह सब हमारे मन के ही खेल हैं। चेतना के जिस स्तर पर हम खड़े हैं, वहाँ से पूरे संसार को उसी रूप में देखते हैं।
अतः यदि हम सकारात्मक सोच रखेंगे, तो हमें सकारात्मक घटनाएँ दिखेंगी, और यदि नकारात्मक सोच रखेंगे, तो पूरा संसार हमें वैसा ही दिखाई देगा। गुरुजी हमें समझाते हैं कि अपने अंदर के खेल को पहचानो और भक्ति, ध्यान तथा सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने जीवन की दिशा निर्धारित करो।
H2: कभी-कभी रुकें और स्वयं से बातचीत करें
भक्ति मार्ग में अगला कदम है आत्म-परीक्षण। दिन में कुछ समय निकालकर शांतचित्त होकर स्वयं से प्रश्न करें:
• “मैं कहाँ गलत हो रहा हूँ?”
• “मेरे विचार कितने निर्मल हैं?”
• “क्या मेरे कर्म मेरे परम लक्ष्य के अनुरूप हैं?”
ऐसी स्व-अवलोकन की प्रक्रिया हमें अहसास कराती है कि हमें किन-किन बिंदुओं पर सुधार या परिवर्तन की ज़रूरत है। यह मानवीय स्वभाव है कि हम दूसरों की कमियाँ जल्दी देखते हैं, पर अपनी खामियों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। असल में, जो भी परिवर्तन लाना है, वह हमें अपने भीतर से ही प्रारंभ करना चाहिए।
H2: छोटे-छोटे प्रयासों से बड़ा परिवर्तन
- दैनिक मंत्र जप:
- भक्ति संगीत सुनें:
- सेवा भाव:
- आभार प्रकट करें:
H2: दिव्य मार्गदर्शन की प्राप्ति
परमात्मा के मार्ग पर चलते हुए कभी-कभी हमें संदेह या दुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए आप आध्यात्मिक परामर्श (spiritual guidance) ले सकते हैं। यदि आप ज्योतिषीय मार्गदर्शन चाहते हैं, तो अपने प्रश्नों के उत्तर के लिए स्वतंत्र ज्योतिष (free astrology) परामर्श भी लिया जा सकता है। बहुत से साधक https://livebhajans.com का उपयोग करके free prashna kundli के माध्यम से भी अपनी शंकाओं का समाधान पाते हैं। यह सब चरण आपके विश्वास को और ज्यादा मजबूत करता है और आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
H3: आध्यात्मिक परामर्श के लाभ
• स्पष्टता: जीवन की समस्याओं को समझने में मदद मिलती है।
• मनोबल में वृद्धि: जान लेते हैं कि ईश्वर हमेशा साथ हैं।
• सही दिशा: “क्या करना चाहिए—क्या न करना चाहिए” का निर्णय करना सरल हो जाता है।
H2: नकारात्मक भावनाओं से निकलना
जीवन में कभी-कभी उदासी, ग़ुस्सा और ईर्ष्या जैसे भाव हमारे मन को घेरे रहते हैं। गुरुजी कहते हैं कि यह सब शरीर और संसार के आकर्षण से जुड़ी अनुभूतियाँ हैं। जैसे ही हम अपने मूल स्वभाव, यानी अपनी दिव्य शक्ति की ओर लौटते हैं, ये सभी नकारात्मक भाव स्वतः ही क्षीण होने लगते हैं।
H2: अपने संकल्प को मजबूत करें
गुरुजी का संदेश है कि “नाम जप करो, सिंहवत रहो।” यदि आपनें कोई संकल्प लिया है—भक्ति करने का, किसी व्यसन को त्यागने का, या किसी अच्छे कार्य को करने का—तो उसे दृढ़ निश्चय के साथ निभाएँ। स्मरण रखें कि आप परमात्मा के अंश हैं, आपके भीतर सब कुछ कर दिखाने की शक्ति है। आत्मबल के आगे बड़ी से बड़ी बाधा भी हार मान लेती है।
H2: पूछें और उद्घाटन पाएं (FAQs)
- प्रश्न: मैं भजन क्यों सुनूँ?
- प्रश्न: सत्संग कितना ज़रूरी है?
- प्रश्न: जीवन के बड़े निर्णय लेने से पहले क्या करना चाहिए?
- प्रश्न: क्या मैं हर प्रश्न के हल के लिए किसी ज्योतिषी या गुरु पर निर्भर हो जाऊँ?
- प्रश्न: मुझे नकारात्मक विचारों से कैसे बाहर निकलना चाहिए?
H2: निष्कर्ष
गुरुजी के इस दिव्य संदेश में हमें एक संपूर्ण जीवन-दर्शन दिखाई देता है। “जब जाओ तो मुस्कुराते हुए हरि के पास जा”—इस वाक्य में जीवन का सार छिपा है। हमारा कर्तव्य है कि हम हर परिस्थिति में डटे रहें, भक्ति और नाम स्मरण को अपना आधार बनाएँ, और जीवन को प्रसन्नता के साथ बिताएँ। यह याद रखें कि आप अविनाशी के अंश हैं; आपके भीतर अनंत शक्ति और प्रेम का स्रोत है।
आशा है कि यह संदेश आपको प्रेरित करेगा और आपके मन में नई चेतना का संचार होगा। अपने संकल्पों को मज़बूत रखिए, दूसरों को प्रेम से देखिए, और स्वयं को ईश्वर को समर्पित कीजिए। यही वह मार्ग है, जो अंत में हमें उसी दिव्य प्रकाश की ओर ले जाएगा, जिसका अंश हम सब हैं।
मिलकर हम सब इस आध्यात्मिक यात्रा पर आगे बढ़ें, दूसरों की सेवा करने और भक्ति का संदेश फैलाने का प्रयास करें। याद रखें कि आपके भीतर छिपी अलौकिक रोशनी ही आपका सबसे बड़ा सहारा है। गुरुजी के इस संदेश के साथ आगे बढ़ें, ताल ठोककर जिएँ और अपने जीवन को आध्यात्मिक प्रकाश से आलोकित करें।

Watch on YouTube: https://www.youtube.com/watch?v=JwHGeR5sCS4
For more information or related content, visit: https://www.youtube.com/watch?v=JwHGeR5sCS4
Originally published on: 2024-10-20T15:28:33Z
Post Comment