ब्रह्म मुहूर्त का महत्व – प्रभात की दिव्यता का अनुभव
केंद्रीय विचार: ब्रह्म मुहूर्त में जागरण का आध्यात्मिक रहस्य
‘ब्रह्म मुहूर्त’ शब्द सुनते ही मन में एक शांति का भाव उमड़ता है। यह रात्रि के अंतिम प्रहर में उत्पन्न वह क्षण है, जब वातावरण, मन और चेतना सबसे निर्मल होती है। हमारे ऋषि-मुनियों ने कहा है कि सूर्योदय से लगभग डेढ़ घंटा पूर्व का समय — यानि प्रातः चार से छह के बीच — ब्रह्म मुहूर्त कहलाता है। इस समय यदि व्यक्ति जागकर जप, ध्यान या भजन में लीन हो, तो उसका मन दिव्यता के निकट होता जाता है।
क्यों यह समय आज के युग में और भी महत्वपूर्ण है
आधुनिक जीवन की भागदौड़ में हम प्रायः रात देर तक जागते हैं और दिन देर से आरंभ करते हैं। इससे हमारे शरीर और मन की प्राकृतिक लय टूट जाती है। ब्रह्म मुहूर्त वह क्षण है जो इस टूटी हुई लय को पुनः जोड़ सकता है।
- यह समय हमारे मस्तिष्क की सक्रियता और आत्मज्ञान के लिए सबसे उपयुक्त होता है।
- श्वास-प्रश्वास संतुलित होते हैं, जिससे ध्यान गहन होता है।
- इस समय किए गए संकल्प, दिन भर के कर्मों का दिशा तय करते हैं।
- जो व्यक्ति नियमित ब्रह्म मुहूर्त में जागता है, उसमें स्फूर्ति, स्थिरता और आनंद सहज रूप से बढ़ते हैं।
तीन वास्तविक जीवन परिदृश्य
1. गृहस्थ जीवन
रीना जी दो बच्चों की माँ हैं। पूरे दिन घर की जिम्मेदारियों में व्यस्त रहती हैं। जब उन्होंने तय किया कि वे हर सुबह 4:30 बजे उठकर केवल 15 मिनट ध्यान करेंगी, तो उन्हें लगा जैसे दिनभर की थकान गायब हो जाती है। अब वे बच्चों और कार्यों के बीच भी एक स्थिर मन रख पाती हैं।
2. विद्यार्थी जीवन
राजेश, एक युवा विद्यार्थी, अगली परीक्षा की तैयारी कर रहा था। देर रात तक पढ़ने के बजाय उसने सुबह ब्रह्म मुहूर्त में अध्ययन शुरू किया। कुछ दिनों में ही स्मरणशक्ति और मनोबल दोनों में अद्भुत वृद्धि अनुभव की।
3. कार्यक्षेत्र का तनाव
संदीप एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। पहले वह तनाव के कारण चिड़चिड़े रहते थे। अब वे हर दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर “श्री हरिवंश महाराज” का स्मरण करते हैं और कुछ पल मौन ध्यान करते हैं। धीरे-धीरे भीतर की बेचैनी कम हुई, और उनका व्यवहार सौम्य एवं सकारात्मक बन गया।
मार्गदर्शित चिंतन – ‘आज के विचार’
चिंतन: कल प्रातः चार के समय का संकल्प लें। स्नान से पूर्व मौन होकर पाँच बार गहरी श्वास लें। फिर अपने भीतर प्रश्न करें – “क्या मैं आज अपने भीतर के प्रकाश से जुड़ने को तैयार हूँ?”
केवल दो से तीन मिनट इस भाव में रहें। चाहे उत्तर न मिले, पर उस प्रश्न की गूंज आपके दिन की दिशा बदल देगी।
जब मन शांत हो, तो किसी मीठे भजनों का श्रवण करें और प्रभात की अनुभूति को आत्मसात् करें।
ब्रह्म मुहूर्त में करने योग्य कार्य
- शुचिता रखें – स्नान या संयमपूर्वक स्वच्छता।
- मंत्र-जप, प्रार्थना या ध्यान।
- स्वाध्याय – प्रेरक ग्रंथ पढ़ना।
- संयम और मौन का अभ्यास।
- नित्य संकल्प – आज किसी को प्रेम और नम्रता देना।
व्यवधानों से निपटने के सरल उपाय
- अलार्म से अधिक मन में संकल्प जगाएं।
- यदि किसी दिन चूक जाएँ तो निराश न हों; अगले दिन नयी शुरुआत करें।
- धीरे-धीरे समय को स्थिर करें – पहले पाँच मिनट, फिर दस, फिर पंद्रह।
- रात्रि में हल्का भोजन लें और मोबाइल दर्शन से विराम लें।
FAQ – सामान्य प्रश्न
1. क्या ब्रह्म मुहूर्त में उठना अनिवार्य है?
अनिवार्य नहीं, पर लाभदायक अवश्य है। धीरे-धीरे शरीर को इस लय में ढालें।
2. यदि इस समय नींद टूटे नहीं तो क्या करें?
रात्रि में समय पर सोना सीखें। नियमितता सबसे बड़ा रहस्य है।
3. क्या ब्रह्म मुहूर्त केवल साधकों के लिए है?
नहीं, यह हर व्यक्ति के लिए उपयोगी है जो आत्मिक संतुलन चाहता है।
4. इस समय कौन-से अभ्यास करें?
ध्यान, नाम-जप, या शुद्ध प्राणायाम – जो मन को शांति दे, वही करें।
5. क्या कोई विशेषज्ञ मार्गदर्शन आवश्यक है?
शुरुआती चरण में किसी ज्ञानी से spiritual guidance लेना सहायक हो सकता है।
संक्षेप में: ब्रह्म मुहूर्त केवल दिन का एक समय नहीं, यह आत्मा का द्वार है। यदि हम थोड़ी जागरूकता के साथ इस क्षण का सम्मान करें, तो जीवन में तनाव के स्थान पर मधुर संतुलन और स्पष्टता स्थापित हो सकती है।
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Originally published on: 2021-09-25T16:06:25Z



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