ब्रह्मचर्य का तेज: आत्म-संयम से उत्पन्न आन्तरिक प्रसन्नता
परिचय
ब्रह्मचर्य, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में केवल शारीरिक संयम नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की पवित्रता का प्रतीक है। यह एक ऐसी अवस्था है जिसमें साधक अपने भीतर के दिव्य प्रकाश को जगाता है और बाहरी संसार की अस्थिरताओं से अचल रहता है।
गुरुजी के प्रवचन में कहा गया कि सच्चा ब्रह्मचारी वही है, जिसके चेहरे पर बिना किसी कारण के प्रसन्नता और शांति झलकती है। यह तेज बाहरी सजावट से नहीं, भीतर की साधना से प्रकट होता है।
कथा: कमल समान साधक
एक बार गुरुजी ने एक सुंदर दृष्टांत सुनाया। उन्होंने कहा — एक झील में दो कमल खिले थे। एक सूर्य की ओर देखता, दूसरा झील के अंधेरे कोने में झुका रहता। पहले कमल पर सूर्य की किरणें पड़तीं, उसका मुख दमकता। दूसरे पर कीचड़ के छींटे पड़ते, वह मंद दिखता। एक दिन हवा चली, और सूर्यमुखी कमल झील के अंधेरे भाग की ओर झुक गया। उसे अनुभव हुआ कि प्रकाश बाहर नहीं, भीतर है। तब दोनों कमल समान उज्ज्वल हो उठे।
नीति:
सच्चे ब्रह्मचर्य का अर्थ भागना नहीं, बल्कि अपने भीतर के सूर्य को पहचानना है। जब साधक का मन निर्मल और नियंत्रित होता है, तो उसका चेहरा आप ही प्रकाशमान हो जाता है।
सीख:
- आत्म-संयम किसी दमन का नाम नहीं; यह आत्म-साक्षात्कार की पहली सीढ़ी है।
- जो व्यक्ति अपने इंद्रियों पर संयम रखता है, वह जीवन में स्थिर, शांत और प्रसन्न रहता है।
- बाहरी यश या प्रशंसा के बिना भी जो व्यक्ति आनंदित रह सके, वही सच्चा ब्रह्मचारी है।
तीन व्यावहारिक उपाय
- दैनिक आत्मसमीक्षा: दिन के अंत में दो मिनट रुककर स्वयं से पूछें — क्या आज मैंने अपनी इंद्रियों को साधन बनाया या महाराज बनने दिया?
- साधना का नियम बनाएं: प्रतिदिन सुबह और शाम 5 मिनट मौन ध्यान करें। यह मौन आपको भीतर के तेज से जोड़ता है।
- सत्वपूर्ण आहार और संगति: भोजन और संगति दोनों मन की शुद्धि को प्रभावित करते हैं। जो आपका मन बांध दे, उससे दूरी रखिए।
चिंतन प्रश्न
आज मैं अपने भीतर की ऊर्जा का कितना भाग बाहरी विषयों में बहा देता हूँ, और कितना भाग आत्म-प्रकाश के लिए सुरक्षित रखता हूँ?
आध्यात्मिक निष्कर्ष
ब्रह्मचर्य केवल जीवन का एक नियम नहीं, बल्कि आत्मा की सहज अवस्था है। जब हम अपने भीतर के तेज को पहचान लेते हैं, तब दुनिया का कोई अंधकार हमें शोकग्रस्त नहीं कर सकता।
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प्रश्नोत्तर (FAQ)
प्रश्न 1: क्या ब्रह्मचर्य केवल युवाओं के लिए आवश्यक है?
उत्तर: नहीं, यह हर आयु और परिस्थिति में लागू सिद्धांत है। इसका सार है आत्मनियंत्रण और जागरूकता।
प्रश्न 2: क्या ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सामान्य जीवन जिया जा सकता है?
उत्तर: बिल्कुल। ब्रह्मचर्य मन की एक अवस्था है, जो किसी भी कर्म या जिम्मेदारी के बीच भी बनाए रखी जा सकती है।
प्रश्न 3: ब्रह्मचर्य से प्राप्त होने वाले लाभ क्या हैं?
उत्तर: इससे मन में स्थिरता, चेहरे पर तेज, और जीवन में गहरी प्रसन्नता आती है।
प्रश्न 4: संयम बनाए रखने में कठिनाई हो तो क्या करें?
उत्तर: ऐसे समय में सजग होकर अपने श्वास पर ध्यान दें और गुरु की शिक्षा को स्मरण करें।
प्रश्न 5: क्या संगीत या भजन सुनना साधना में सहायक है?
उत्तर: हां, दिव्य संगीत मन को संतुलित करता है और आत्मचेतना को जगाने में सहायक होता है।
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Originally published on: 2023-09-29T15:38:15Z



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