आत्म-संयम का प्रकाश: जीवनी शक्ति की रक्षा का मार्ग

परिचय

हमारा शरीर और मन—दोनों ही ईश्वर के दिए गए अद्भुत वरदान हैं। जब हम अपनी जीवन ऊर्जा का सम्मान करते हैं, तो भीतर एक दिव्य संतुलन प्रकट होता है। परंतु जब यह ऊर्जा असंयम से क्षीण होती है, तब वही शक्ति हमारे लिए दुख और निराशा का कारण बन जाती है।

गुरुजी ने अपने प्रवचन में इसी विषय पर गहन विचार रखे। उन्होंने कहा कि आत्म-संयम केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक साधना का हिस्सा है। यह नहीं कि शरीर की इच्छाओं को दबाया जाए, बल्कि उन्हें सही दिशा दी जाए।

जीवनी शक्ति – एक दिव्य धारा

जीवनी शक्ति या प्राणशक्ति वह ईश्वरदत्त ऊर्जा है जो हमारे भीतर लगातार प्रवाहित होती रहती है। यह सिर्फ शरीर को जीवंत नहीं रखती, बल्कि हमारी बुद्धि, इच्छाशक्ति और आत्मबल की भी मूलवर्ती शक्ति है।

  • जब हम इस ऊर्जा का दुरुपयोग करते हैं, तो हमारी आभा मंद पड़ जाती है।
  • संयम रखने से स्मृति, ध्यान और मानसिक शांति में वृद्धि होती है।
  • शुद्ध जीवन शक्ति ही भक्ति, ध्यान और करुणा को गहराई देती है।

प्रेरणादायक कथा

एक बार एक युवक गुरुजी के पास आया। उसका चेहरा म्लान था, आँखों में थकान थी। उसने कहा, “गुरुदेव, मैं निरंतर अशक्त होता जा रहा हूँ। कोई औषधि काम नहीं कर रही।” गुरुजी ने शांत मुस्कान के साथ पूछा, “क्या तुम अपने भीतर की शक्ति को असंयम से खो रहे हो?” युवक ने सिर झुका लिया।

गुरुजी ने एक दीपक दिखाया और बोले, “यह दीपक तब तक प्रकाश देता है जब तक इसका तेल सुरक्षित रहता है। यदि तुम लगातार दीपक से तेल निकालते रहो, तो प्रकाश बुझ जाएगा।” युवक ने उसी क्षण समझ लिया कि उसका असली रोग कोई बाहरी बीमारी नहीं, बल्कि आत्म-अनुशासन की कमी थी। उस दिन से उसने संयम का मार्ग अपनाया, और धीरे-धीरे उसकी आभा लौट आई।

नैतिक प्रेरणा

इस कथा का गूढ़ संदेश है – हमारी जीवनी शक्ति अनमोल है। उसका सम्मान ही आत्म-सम्मान है। जब हम अपनी ऊर्जा को पवित्र कार्यों में लगाते हैं, तो भीतर से प्रकाश फैलने लगता है।

दैनिक जीवन के तीन व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • सचेत दिनचर्या: सोने, उठने, भोजन और प्रार्थना के समय को संतुलित रखें। इससे शरीर का prana संतुलित रहता है।
  • ध्यान और भजन: प्रतिदिन कुछ समय मौन में बैठें, श्वास पर ध्यान दें, या भजनों का श्रवण करें। यह आपकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देता है।
  • सेवा और करुणा: अपनी शक्ति का उपयोग किसी के जीवन में प्रकाश लाने में करें।

मृदु चिंतन संकेत

आज रात जब आप मौन में बैठें, स्वयं से पूछें – “मैं अपनी ऊर्जा कहाँ खर्च कर रहा हूँ? क्या यह ईश्वरीय उद्देश्य के अनुरूप है?” इस प्रश्न से मिलने वाला उत्तर आपकी साधना का अगला कदम होगा।

आत्म-संयम की साधना के लाभ

  • मन की स्वच्छता और स्थिरता।
  • अंतरात्मा में गहराई और प्रार्थना की सामर्थ्य।
  • सृजनशीलता, उत्साह और स्वास्थ्य में वृद्धि।

FAQs

1. आत्म-संयम का अर्थ क्या है?

आत्म-संयम का अर्थ इच्छाओं को दबाना नहीं, बल्कि उन्हें सही दिशा देना है ताकि जीवन में संतुलन और प्रकाश बना रहे।

2. क्या यह केवल युवाओं के लिए आवश्यक है?

नहीं, यह हर व्यक्ति के लिए उपयोगी है। आत्म-संयम मानसिक शांति और आत्म-विकास में सहायक होता है।

3. क्या ध्यान करने से यह शक्ति बढ़ती है?

हाँ, ध्यान और प्रार्थना से प्राणशक्ति केंद्रित होती है और मन शुद्ध होता है।

4. यदि मन बार-बार विचलित हो तो क्या करें?

अपने मन को प्रेमपूर्ण अनुशासन में रखें। जब भी मन भटके, गहरी सांस लेकर वर्तमान में लौट आएं।

5. गुरु का क्या महत्व है?

गुरु हमें दर्पण दिखाते हैं। उनकी spiritual guidance से हम अपने अंदर की शक्ति को पहचानना सीखते हैं।

अंतिम प्रेरणा

जीवन कोई संघर्ष नहीं, एक साधना है। जब आप अपनी ऊर्जा को सचेत रूप से साध लेते हैं, तो वही ऊर्जा भक्ति, करुणा और आनंद के रूप में खिल उठती है। अपने भीतर के प्रकाश को पहचानिए, उसका आदर कीजिए, और दूसरों के जीवन में भी उस प्रकाश की किरण बनिए।

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Originally published on: 2023-09-20T15:21:52Z

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