सहनशीलता का दिव्य रहस्य: भीतर की शांति की साधना
सहनशीलता ही साधना की परीक्षा
गुरुजी के उपदेश का सार यह था कि कोई व्यक्ति साधना को सच्चे रूप में पुष्ट तभी कर सकता है जब वह प्रतिकूल स्थितियों में भी शांत रहे। जब कोई गाली दे, अपमानित करे या चोट पहुंचाए, तब बाहर से कठोर वचन न बोलना ही साधक की वास्तविक शक्ति है।
भीतर की दृष्टि
गुरुजी ने कहा—यदि कोई आपको कष्ट देता है तो समझ लें यह इष्ट की अनुमति से हो रहा है। कोई भी तुझ पर बिना परमात्मा की आज्ञा से थप्पड़ नहीं मार सकता। साधक को यह दृढ़ विश्वास रखना चाहिए कि प्रत्येक घटना का संचालन परम करुणामय शक्ति कर रही है।
एक प्रेरक कथा
गुरुजी ने ‘उड़िया बाबा’ की लीला सुनाई। बाबा अयोध्या में रहते थे। एक बार जब उनकी झोपड़ी में किसी ने आग लगा दी, तो लोग दुखी हुए, किंतु बाबा कहने लगे — “यह सब हरि की इच्छा से है। यदि शरीर जल गया तो क्या फर्क पड़ता है? हम उसी की ओर लौटेंगे जिससे सब प्रारंभ हुआ।” बाबा शांत बैठे रहे, उन्होंने दोष नहीं दिया, शाप नहीं दिया। आग बुझी और उसी व्यक्ति को बाद में गहरा पश्चाताप हुआ। वह बाबा का भक्त बनकर उनका शिष्य बन गया।
मोरल इनसाइट
जो व्यक्ति प्रतिकूलता में भी ‘चुप’ रह सकता है, वह संसार को नहीं, अपने भीतर के तूफ़ान को जीतता है। सहनशीलता कोई दुर्बलता नहीं; यह आत्मबल का सर्वोच्च प्रमाण है। बाबा की कथा हमें बताती है कि जब हम प्रतिक्रिया नहीं करते, तब ईश्वर स्वयं न्याय करता है।
तीन व्यावहारिक अनुप्रयोग
- 1. शांत प्रतिक्रिया: जब कोई अपमान करे या गलत बोले, तुरंत उत्तर देने से पहले तीन बार गहरी सांस लें। इससे मन को शांत रखकर विवेक जागृत होगा।
- 2. करुणा का संचार: जिस व्यक्ति ने आपको दुःख दिया, उसके लिए मन में शुभकामना करें — “हे प्रभु, उसकी बुद्धि में प्रकाश दो।” यह भावना आपको नकारात्मकता से मुक्त करेगी।
- 3. आत्म-स्मरण: दिन में कम से कम एक बार यह वाक्य याद करें — “मेरे साथ जो कुछ होता है, वह मुझे आगे बढ़ाने के लिए है।” इस स्मरण से हर परिस्थिति अवसर बन जाती है।
मृदु चिंतन प्रश्न
आज किसी व्यक्ति या परिस्थिति ने आपको असहज किया हो तो विचार करें — क्या मैंने उसे भीतर से क्षमा कर दिया? यदि नहीं, तो क्यों रोके हुए हूं? क्या यह भार मेरे शांति को सीमित कर रहा है?
साधना का सार
साधक का पथ कठिन जरूर होता है, पर हर प्रतिकूलता में ईश्वर का संदेश छिपा है। जब कोई हमें चोट पहुंचाता है तो वह केवल हमारे अहंकार को छूता है, आत्मा को नहीं। यदि हम चुप रह सकें, नम्र रह सकें, तो वह शक्ति हमारे अंदर जागृत हो जाती है जिसे ‘शांति’ कहते हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से न्याय का स्वरूप
गुरुजी ने समझाया कि हमें किसी को दंड देने की भावना से नहीं भरना चाहिए। हम केवल प्रार्थना करें — “मालिक, उस व्यक्ति की बुद्धि बदल दो, उसे अपना भक्त बना लो।” जब हम यह विनम्रता अपनाते हैं, तो जीवन की सारी कठिनाइयाँ सहज शिक्षा बन जाती हैं, न कि बोझ।
धैर्य का अभ्यास
सहनशीलता एक दिन में नहीं आती। कभी नियम टूट जाए, तो पुनः लें। जैसे बच्चा चलना सीखते-सीखते गिरता है, वैसे ही साधक भी अपने धैर्य को स्थिर करता है। यह प्रक्रिया हमें आत्म-विश्वास देती है कि हर परीक्षा एक नयी जागृति का द्वार है।
आत्मसंयम के वरदान
सच्चा संयम तब आता है जब हम बाहरी शोर से ऊपर उठकर भीतर की आवाज सुनते हैं। वहां केवल ईश्वर की कृपालु दृष्टि होती है। जो इस दृष्टि को पहचान लेता है, उसे संसार परेशान नहीं कर सकता। उसका शांत रहना स्वयं एक साधना है।
अंत में – आत्मनिष्ठा की लौ
गुरुजी के वचन हमें यह सिखाते हैं कि साधना का प्रारंभ ‘संयम’ से होता है और परिपाक ‘समर्पण’ में समाप्त होता है। हर दर्द में छिपा है एक नया अनुभव। जब हम धैर्य रखकर प्रतीक्षा करते हैं, तो हमें वही शक्ति मिलती है जो संतों के जीवन में थी। यही सहनशीलता जीवन का पुष्प है।
आध्यात्मिक निष्कर्ष
जब कोई प्रतिकूलता आए, तो उसे शत्रु नहीं, शिक्षक मानें। ईश्वर का न्याय हमारे कर्मों से चलता है; हम केवल शांत साक्षी रहें। यही शांत दृष्टि जीवन को दिव्य बना देती है। यदि आप इस विषय पर और गहन spiritual guidance चाहते हैं, तो वहाँ उपलब्ध सत्संग और भजनों से प्रेरणा पा सकते हैं।
FAQs
1. क्या सहनशीलता का अर्थ कमजोरी है?
नहीं, यह आत्मबल का सर्वोच्च रूप है। जो चुप रह सकता है, वह भीतर से सबसे मजबूत होता है।
2. यदि कोई बार-बार अपमान करे तो क्या करें?
रक्षित दूरी बनाएं, पर मन में द्वेष न रखें। ईश्वर से उस व्यक्ति का कल्याण माँगें।
3. क्या हर घटना ईश्वर की इच्छा से होती है?
हर घटना में उसकी अनुमति या शिक्षा छिपी होती है। समझना हमारी साधना का हिस्सा है।
4. प्रतिकूल स्थिति में मन क्यों अशांत होता है?
क्योंकि हम परिस्थिति को नियंत्रित करना चाहते हैं। जब स्वीकारना सीख जाते हैं, शांति स्वतः आती है।
5. सहनशीलता का अभ्यास कैसे शुरू करें?
थोड़े छोटे अपमानों में मौन रखें। धीरे-धीरे यह शक्ति स्थायी बन जाती है।
Watch on YouTube: https://www.youtube.com/watch?v=HAJQvumSyNA
For more information or related content, visit: https://www.youtube.com/watch?v=HAJQvumSyNA
Originally published on: 2021-07-18T07:24:36Z


Post Comment