प्रारब्ध और भजन की शक्ति

भजन से प्रारब्ध का क्षय

गुरुजी के वचनों में एक अनमोल सत्य छिपा है – प्रारब्ध चाहे कितना भी कठोर क्यों न हो, उसकी शक्ति भजन के आगे टिक नहीं पाती। जब मनुष्य भक्ति मार्ग पर चलता है, तो उसका संचित कर्म भस्म हो जाता है और प्रारब्ध निष्फल होने लगता है। यही वह क्षण है जब आत्मा को भगवान प्राप्ति का मार्ग खुलता है।

प्रारब्ध का अर्थ

प्रारब्ध वो कर्म हैं जो हमारे वर्तमान जीवन में फल दे रहे होते हैं। इनसे कोई बच नहीं सकता, परंतु भजन और तप द्वारा इनकी तीव्रता कम की जा सकती है।

भजन का महत्व

  • भजन आत्मा को शुद्ध करता है।
  • यह संसार के दुखों से ऊपर उठने की शक्ति देता है।
  • भजन से ईश्वर का साक्षात्कार संभव होता है।

कथा: साधु और उसके प्रारब्ध

एक बार एक साधु अत्यंत गरीबी में जीवन व्यतीत कर रहा था। उसके पास खाने को भी नहीं था, पर वह दिन-रात भजन करता था। गाँव वाले उसका मज़ाक उड़ाते कि भाग्य में निर्धनता लिखी है, तो भजन क्या बदल देगा? पर साधु ने हृदय से भगवान का स्मरण नहीं छोड़ा।

एक दिन एक यात्री वहाँ आया। उसने साधु से भजन की महिमा सुनी और इतना प्रभावित हुआ कि उसने अपने सारे भोजन और वस्त्र साधु को दान कर दिए। उस क्षण साधु के जीवन का रुख बदल गया – न केवल उसके पास पर्याप्त साधन आ गए, बल्कि उसके भीतर ऐसी शांति उत्पन्न हुई जो धन से बढ़कर थी।

इस कथा का नैतिक संदेश

जब व्यक्ति पूरी श्रद्धा से भजन करता है, तो प्रारब्ध भी उसकी भक्ति के आगे झुक जाता है। ईश्वर कृपा का द्वार भजन द्वारा ही खुलता है, भाग्य द्वारा नहीं।

तीन व्यावहारिक प्रयोग

  • हर दिन कुछ मिनट शांत बैठकर ‘भगवान’ का नाम जपें।
  • अपने कठिन समय को भजन के अवसर की तरह स्वीकार करें।
  • दूसरों को भी ईश्वर स्मरण की प्रेरणा दें।

चिंतन का कोमल प्रश्न

मैं अपने जीवन के कौन से दुःखों को भजन द्वारा रूपांतरित कर सकता हूँ?

आध्यात्मिक निष्कर्ष

भजन केवल स्वर या शब्द नहीं है; यह आत्मा की पुकार है। जब हम सच्ची निष्ठा से भजन करते हैं, तब भाग्य की सीमाएँ मिट जाती हैं और परमात्मा का सान्निध्य प्राप्त होता है। उसी भजन की धारा में मोक्ष की ओर पहला कदम उठता है।

यदि आप भजन, ध्यान या spiritual guidance के लिए प्रेरणा चाहते हैं, तो वहां आपको भक्ति की मधुर लहरें मिलेंगी जो हृदय को निर्मल कर देंगी।

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Originally published on: 2024-04-10T03:04:16Z

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