पहली झलक में मिला अनंत प्रेम – श्री महाराज जी से अविस्मरणीय भेंट
प्रेममय भेंट का आरंभ वृंदावन धाम की एक शांत संध्या थी। एक साधक पहली बार…
प्रेममय भेंट का आरंभ वृंदावन धाम की एक शांत संध्या थी। एक साधक पहली बार…
केन्द्रीय विचार : वाणी में गुरु का रूप पहचाननामनुष्य प्रायः गुरु के शारीरिक स्वरूप में…
गुरु का वास्तविक स्वरूप: वाणी में विराजमान तत्व पूज्य महाराज जी के इस discourse में…
केन्द्रीय विचारआज का विचार है – ब्रह्मचर्य या आत्म-संयम की शक्ति। जब मनुष्य अपने विचारों,…
परिचयब्रह्मचर्य, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में केवल शारीरिक संयम नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की…
केन्द्रीय विचारगृहस्थ जीवन को अक्सर हल्के में लिया जाता है, पर वास्तव में यह एक…
गृहस्थ जीवन: साधना का वास्तविक मैदान गुरुजी के उपदेश में एक गहरी बात है –…