प्रारब्ध और भजन की शक्ति
प्रारब्ध की वास्तविकता और उसका क्षयहर मनुष्य अपने जीवन में प्रारब्ध के अनुसार सुख-दुःख भोगता…
प्रारब्ध की वास्तविकता और उसका क्षयहर मनुष्य अपने जीवन में प्रारब्ध के अनुसार सुख-दुःख भोगता…
परिचय कभी-कभी जीवन के मार्ग पर हम यह सोचते हैं कि ज्ञान केवल पुस्तकों और…
नाम-जप: कलयुग में सबसे सरल साधनागुरुजी के वचनों का सार यही है कि नाम-जप केवल…
हार का असली अर्थ गुरुजी कहते हैं – यदि तुम्हें लगता है कि तुम हार…
दीक्षा का अर्थ और उसके दो स्वरूपदीक्षा शब्द का अर्थ है – ‘मनुष्य को अंधकार…
परिचय जीवन में हर मनुष्य की यात्रा किसी न किसी कामना से आरंभ होती है।…
गुरु के दर्शन का प्रथम क्षणजब किसी साधक के जीवन में प्रथम बार सद्गुरु के…
वाणी में गुरु का स्वरूप हमारे गुरु का असली स्वरूप वाणी में ही विराजमान होता…
ब्रह्मचर्य का अर्थ और उसका जीवंत तेज ब्रह्मचर्य का पालन केवल बाहरी संयम नहीं, बल्कि…
गृहस्थी का किला और माया पर विजयगुरुजी के वचन हमें जीवन की सबसे गहरी सच्चाई…